सागर विश्वविद्यालय मै जैव प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार द्वारा प्रायोजित चार दिवसीय नेक्स्ट जेनरेशन सीक्वेंसिंग एवं एडवांस्ड मॉलिक्यूलर तकनीक कार्यशाला का आयोजन।

विश्वविद्यालय: जैव प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार द्वारा प्रायोजित चार दिवसीय नेक्स्ट जेनरेशन सीक्वेंसिंग एवं एडवांस्ड मॉलिक्यूलर तकनीक कार्यशाला का आयोजन।

 सागर- डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय (केन्द्रीय विश्वविद्यालय), सागर के जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा “नेक्स्ट जेनरेशन सीक्वेंसिंग (NGS) एवं एडवांस्ड मॉलिक्यूलर तकनीक” विषय पर जैव प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार प्रायोजित चार दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन 27 से 30 जनवरी 2026 तक स्वदेशी भवन, जैव प्रौद्योगिकी विभाग में किया गया।
कार्यशाला का उद्घाटन विभागाध्यक्ष एवं निदेशक (अनुसंधान एवं विकास) प्रो. श्वेता यादव द्वारा किया गया। उन्होंने अपने संबोधन में आधुनिक जैविक अनुसंधान में उन्नत मॉलिक्यूलर एवं सीक्वेंसिंग तकनीकों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए प्रतिभागियों को नवीन अनुसंधान विधियों को अपनाने हेतु प्रेरित किया।
कार्यशाला के संयोजक एवं मुख्य आयोजक डॉ. सी. पी. उपाध्याय, सहायक प्राध्यापक, जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा कार्यशाला की योजना, समन्वय एवं सफल संचालन किया गया। उद्घाटन सत्र का संचालन डॉ. दीक्षी अंगीरा, सहायक प्राध्यापक, जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा किया गया।
चार दिवसीय कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को डीएनए एवं आरएनए आइसोलेशन, NGS सैंपल एवं लाइब्रेरी प्रिपरेशन, सेंगर सीक्वेंसिंग, cDNA सिंथेसिस तथा रियल-टाइम PCR जैसी आधुनिक मॉलिक्यूलर तकनीकों का सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
कार्यशाला का समापन प्रश्नोत्तरी सत्र एवं प्रमाण-पत्र वितरण के साथ हुआ, जिसमें मुख्य अतिथि प्रो. एम. एल. खान, पूर्व विभागाध्यक्ष, वनस्पति एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग उपस्थित रहे। उन्होंने प्रतिभागियों को अनुसंधान में उन्नत तकनीकों के प्रभावी उपयोग हेतु प्रेरित किया।
इस कार्यशाला में थर्मो फिशर साइंटिफिक से आमंत्रित विशेषज्ञ डॉ. विशाल धार एवं श्री प्रविन निर्वाला द्वारा दिए गए व्याख्यान एवं प्रयोगात्मक प्रदर्शनों ने प्रतिभागियों के लिए सीखने का प्रभावी मंच प्रदान किया। यह कार्यशाला विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुई, जिससे उनकी उन्नत मॉलिक्यूलर एवं सीक्वेंसिंग तकनीकों की समझ तथा व्यावहारिक दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
समापन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. लतीफ़ खान उपस्थित रहे। उन्होंने इस प्रकार के हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम ही विद्यार्थियों को उद्योग-उन्मुख प्रशिक्षण एवं कौशल प्रदान करते हैं, जो वर्तमान समय की एक अत्यंत आवश्यक आवश्यकता है।
उन्होंने जैव प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार के प्रति भी आभार व्यक्त किया, जिसके वित्तीय सहयोग से इस कार्यशाला का आयोजन संभव हो सका। साथ ही उन्होंने कार्यशाला संयोजक, आयोजक एवं सचिव को सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएँ प्रदान कीं।

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