सागर में “ मातृ एवं शिशु मृत्यु दर की रोकथाम पर” सेमिनार का आयोजननर्सिंग होम एसोसिएशन संघ सागर के तत्वावधान मे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर की रोकथाम के लिए आयोजन किया गया ।


सागर - दिनांक 9अगस्त 2026(रविवार) को शहर के एक निजी होटल में सेमिनार का आयोजन किया गया।
सेमिनार में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य कार्यालय में पदस्थ जॉली मैम ने Mtp पर अपना उदबोधन दिया। उन्होंने बताया कि नए नियम के तहत 24 हफ्ते तक के मरीजों की Mtp की जा सकती है इसके लिए संस्था को दो स्त्री रोग विशेषज्ञ की जरूरत होती है,उसके लिए संस्था को कार्यालय में जानकारी देकर इसका रजिस्ट्रेशन प्राप्त करना होता है।डॉ सर्वेश जैन ने death on table पर अपना व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि शल्य चिकित्सा के दौरान एनेस्थेसिया देने पर 10000 मरीजों में से 3 को कार्डिक अरेस्ट हो सकता है इसका लेख किताबों में भी है।कोई भी चिकित्सक जानबूझकर किसी भी मरीज की जान से खिलवाड़ नहीं करता है। मरीजों के परिजनों को इलाज के दौरान मरीज की मृत्यु होने पर संयम रखना चाहिए अस्पताल में किसी भी प्रकार की तोडफ़ोड़ एवं अभद्र व्यवहार नहीं करना चाहिए।पूर्व क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सागर डॉ नीना गिडियन ने मातृ एवं शिशु मृत्यु दर पर व्याख्यान दिया एवं उसके रोकथाम के उपाय के बारे में बताया।सिविल सर्जन सागर डॉ आर एस जयंत ने शिशु मृत्यु दर को नियंत्रित करने के उपाय बताये। वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ शशि ठाकुर ने Pcpndt एक्ट की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस एक्ट के तहत एक मशीन एक चिकित्सक के नाम पर ही रजिस्टर्ड होती है उस मशीन से रजिस्टर्ड चिकित्सक ही सोनोग्राफी कर सकता है,कोई दूसरा चिकित्सक सोनोग्राफी नहीं कर सकता है। एवं जिस जगह पर मशीन को रजिस्टर्ड किया गया है उसी स्थान पर मरीजों की सोनोग्राफी जांच की जा सकती है मशीन को किसी दूसरी जगह ले जाकर सोनोग्राफी का कार्य नहीं किया जा सकता है।मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सागर डॉ देवेश पटेरिया ने Pcpndt एक्ट की कमेटी में रहने वाले सदस्यों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक हॉस्पिटल के चिकित्सक को प्रत्येक मरीज के इलाज का रिकॉर्ड प्रथम दिन से प्रत्येक मिनट का रखना चाहिए। चिकित्सक के द्वारा मरीजों के इलाज का रिकॉर्ड रखने में की गई लापरवाही के लिए चिकित्सक स्वयं उत्तरदायी होता है , ऐसा करने की स्थिति में उसके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ पी एस ठाकुर ने हॉस्पिटल में मरीजों के परिजनों के द्वारा अभद्रता एवं उपद्रव के समय उसको कैसे रोका जाए एवं स्वयं की रक्षा कैसे की जाए उसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हॉस्पिटल में इस तरह की घटना घटित होने पर हॉस्पिटल के चिकित्सक या संचालक को  सर्वप्रथम पुलिस को फोन करके इसकी सूचना देना चाहिए।क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सागर डॉ सुरेखा जैमरे ने हॉस्पिटल संचालन के नियमों की जानकारी दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता संघ के अध्यक्ष डॉ संजीव मुखारया ने की। आभार डॉ जी एस चौबे ने व्यक्त किया।कार्यक्रम में ,डॉ अशोक सिंघई, डॉ गुरनाम सिंह डॉ अरुण सिंघई, डॉ प्रमोद सिंघई, डॉ सिम्मी मुखारया, डॉ साधना मिश्रा, डॉ ममता सिंघई, डॉ हर्ष मिश्रा, डॉ एस के सिंह, डॉ निधि जैन, डॉ अशोक जैन, डॉ राजेंद्र जैन, डॉ संजयोत माहेश्वरी, डॉ एल के शाक्या, डॉ एन एस शाक्या, डॉ शैलेंद्र सिंह, डॉ निधि मिश्रा, डॉ जाह्नवी मुखारया, डॉ मोनिका जैन, डॉ स्वाति पटेल, डॉ अनिल तिवारी, डॉ प्रदीप रोहण, डॉ सुकृति श्रीवास्तव, डॉ प्रियंका तिवारी, डॉ राकेश शर्मा, डॉ तरुणा शर्मा, डॉ रजनीश मिश्रा,अमितेश जैन, अभिषेक जैन, महेद्र राय उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को सफल बनाने में  नर्सिंग होम एसोसिएशन संघ के पदाधिकारियों एवं सदस्यों का विशेष सहयोग रहा।

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