सागर- भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत मुरैना कार्यालय द्वारा दो दिवसीय आई.पी.एम. (एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन) ओरिएंटेशन कार्यक्रम का आयोजन दिनांक 18 एवं 19 जनवरी 2026 को चनौआ बुजुर्ग कृषक उत्पादक किसान संगठन, चनौआ बुजुर्ग तथा रेंगवा, रेहली, सागर में किया गया।
इस कार्यक्रम में सुनीत कुमार कटियार, सहायक निदेशक (ख.वि.), अभिषेक सिंह बादल, सहायक वनस्पति संरक्षण अधिकारी, श्री राजेश त्रिपाठी, उप संचालक कृषि, सागर, डॉ. आशीष कुमार त्रिपाठी, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख, केवीके बिजोरा (सागर) तथा श्री लक्ष्मी शंकर कुर्मी, डायरेक्टर कृषक उत्पादक किसान संगठन, चनौआ बुजुर्ग, जनपद सदस्य श्री करण कुर्मी सहित 100 से अधिक किसानों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इसके पश्चात संस्थान के निदेशक द्वारा सभी किसानों का अभिवादन करते हुए संस्थान की गतिविधियों एवं उद्देश्यों की जानकारी दी गई। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को खेती में एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन तकनीकों (शस्य, यांत्रिक, जैविक एवं रासायनिक क्रियाएँ) से अवगत कराना तथा रासायनिक कीटनाशकों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना रहा।
प्रभारी अधिकारी सुनीत कुमार कटियार ने सब्जी फसलों में पाए जाने वाले मित्र कीटों की पहचान, उनके महत्व, संरक्षण एवं संवर्धन पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि मित्र कीटों के संरक्षण से फसलों में हानिकारक कीटों की रोकथाम संभव है, जिससे रासायनिक कीटनाशकों के दुष्प्रभावों से बचते हुए खेती की लागत कम की जा सकती है।
श्री राजेश त्रिपाठी, उप संचालक कृषि, सागर ने जिले में कीट एवं व्याधियों की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत चर्चा की। वहीं डॉ. आशीष कुमार त्रिपाठी ने सब्जी एवं दलहनी फसलों में लगने वाले प्रमुख कीटों एवं उनके प्रभावी प्रबंधन की जानकारी दी।
कृषि पारिस्थितिकी तंत्र विश्लेषण का महत्व
सहायक वनस्पति संरक्षण अधिकारी अभिषेक सिंह बादल ने कृषि पारिस्थितिकी तंत्र विश्लेषण की प्रक्रिया एवं उसके महत्व को समझाया। उन्होंने बताया कि इस विश्लेषण के माध्यम से किसान फसल में लगने वाले कीट एवं बीमारियों से होने वाले नुकसान का आकलन कर स्वयं विवेकपूर्ण निर्णय ले सकते हैं तथा अनावश्यक खर्चों को कम कर सकते हैं।
रसायनों का सुरक्षित एवं विवेकपूर्ण उपयोग
तकनीकी अधिकारियों द्वारा किसानों को बताया गया कि आवश्यकता होने पर ही CIBRC द्वारा अनुशंसित रसायनों का निर्धारित मात्रा में उपयोग करें। साथ ही रसायनों के अंधाधुंध प्रयोग से मानव स्वास्थ्य एवं पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के दौरान सब्जी की खेती का मैदानी भ्रमण भी कराया गया, जिसमें कीट, रोग एवं मित्र कीटों की पहचान तथा कम लागत में उनके प्रबंधन की विधियों को समझाया गया।
जैविक जीवों का वितरण
कार्यक्रम के समापन पर सभी उपस्थित किसानों को जैविक जीवों का निःशुल्क वितरण किया गया एवं खेती में जैविक उत्पादों के उपयोग हेतु प्रेरित किया गया। यह दो दिवसीय आई.पी.एम. ओरिएंटेशन कार्यक्रम किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुआ, जिससे उन्हें जैविक खेती, कीट प्रबंधन एवं स्वास्थ्य-सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन जानकारी प्राप्त हुई।