अंधे कत्ल का सनसनीखेज पर्दाफाश बोरी में बंद लाश की गुत्थी सुलझी, मास्टरमाइंड महिला सहित भाई गिरफ्तार ।





सागर -  पुलिस अधीक्षक श्री विकास शाहवाल के कुशल नेतृत्व एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सागर श्री लोकेश कुमार सिन्हा के मार्गदर्शन में थाना बहेरिया पुलिस ने एक बेहद पेचीदा और अंधे कत्ल के मामले का मात्र 48 घंटों में खुलासा करने में सफलता प्राप्त की है। पुलिस ने न केवल मृतक की शिनाख्त की, बल्कि हत्या की साजिश रचने वाले मुख्य आरोपियों को भी सलाखों के पीछे पहुँचा दिया है।

​1. सनसनीखेज सूचना और घटना का विवरण
​घटना की शुरुआत दिनांक 11/04/2026 की सुबह हुई, जब थाना बहेरिया पुलिस को सूचना मिली कि सागर-बंडा रोड पर हरिओम वेयर हाउस के सामने, कर्रापुर फोरलेन के किनारे एक जूट की बोरी संदिग्ध अवस्था में पड़ी है। पुलिस टीम ने जब मौके पर पहुँचकर बोरी को खोला, तो उसमें एक अज्ञात व्यक्ति का खून से लथपथ शव बरामद हुआ। इस नृशंस हत्या की खबर से पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई।

​2. शिनाख्त की चुनौती और सफलता
​शव पूरी तरह खून से सना हुआ था और मृतक के पास पहचान का कोई तात्कालिक साधन नहीं था। थाना प्रभारी उनि. विधानंद यादव ने टीम के साथ तत्काल आसपास के गाँवों और थानों में संपर्क किया। वैज्ञानिक साक्ष्यों और स्थानीय नेटवर्क की मदद से मृतक की शिनाख्त महेन्द्र अहिरवार (उम्र 44 वर्ष) निवासी ग्राम भेडा, थाना बंडा के रूप में हुई। शिनाख्त होते ही पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच की दिशा तय की।

​3. पुलिस की सक्रियता और 'स्मार्ट इन्वेस्टिगेशन'
​पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर एएसपी श्री लोकेश सिन्हा और सीएसपी श्री योगेन्द्र सिंह भदौरिया के मार्गदर्शन में एक विशेष टीम गठित की गई। पुलिस ने आरोपियों तक पहुँचने के लिए त्रि-स्तरीय रणनीति अपनाई:
​सीसीटीवी का जाल: पुलिस ने घटना स्थल से लेकर शहर के मुख्य मार्गों तक के दर्जनों सीसीटीवी कैमरों के फुटेज को घंटों खंगाला। इसी दौरान एक नीले रंग का इलेक्ट्रिक ऑटो संदिग्ध पाया गया।
​तकनीकी साक्ष्य: मृतक के मोबाइल कॉल डिटेल्स और संदिग्धों के लोकेशन का बारीकी से विश्लेषण किया गया।
​ग्राउंड इंटेलिजेंस: मुखबिर तंत्र को सक्रिय कर संदिग्धों की गतिविधियों पर नजर रखी गई।
​4. हत्या की खौफनाक साजिश का खुलासा
​पूछताछ और साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने शारदा अहिरवार को हिरासत में लिया। कड़ी पूछताछ में उसने जुर्म स्वीकार करते हुए बताया कि मृतक महेंद्र का उसकी बहन के साथ पुराना प्रेम प्रसंग था, जिससे हुई बदनामी का बदला लेने के लिए उसने यह साजिश रची।
​वारदात: महेंद्र को बहाने से राजीव नगर बुलाया गया। जहाँ खाना खाते समय आरोपियों ने उसे पीछे से दबोच लिया और कुल्हाड़ी से वार कर मौत के घाट उतार दिया।
​साक्ष्य मिटाना: हत्या के बाद शव को ठिकाने लगाने के लिए नीले ऑटो का इस्तेमाल किया गया।

​5. गिरफ्तार आरोपी
​शारदा अहिरवार (मुख्य साजिशकर्ता) - निवासी ग्राम भेडा।
​भूपेन्द्र अहिरवार - निवासी राजीव नगर, मोतीनगर।
(अन्य फरार आरोपियों की तलाश में पुलिस दबिश दे रही है)

​6. सराहनीय भूमिका (सराहनीय टीम)
​इस चुनौतीपूर्ण हत्याकांड को सुलझाने में निम्नलिखित टीम की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही:
​उनि. विधानंद यादव (थाना प्रभारी, बहेरिया)
​सउनि. श्रीधर अहिरवार
​आरक्षक: दुर्गेश सोनी, शिवम कटारे, मंगल सिंह ठाकुर, नरेन्द्र रावत, राघवेन्द्र राजपूत।
​महिला आरक्षक: भावना श्रीवास्तव, नम्रता मौर्य, दीपा चौरसिया, अंकिता अग्निहोत्री।
​"सागर पुलिस अपराध और अपराधियों के विरुद्ध 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर कार्य कर रही है। तकनीकी दक्षता और टीम वर्क के कारण ही इस अंधे कत्ल का त्वरित खुलासा संभव हो सका।


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