सागर - शासकीय संभागीय ITI सागर को भी MPPSC परीक्षा केन्द्र बनाया गया था, इस परीक्षा केन्द्र को परीक्षा हॉल की फोटो खींच कर ITI के टीचर प्रदीप उपाध्याय ने परीक्षा की गोपनीयता और सुरक्षा को भंग कर फोटो को वायरल की है, जिसमें टीचर रमन दुबे, विपिन तिवारी , भारती उपाध्यक्ष और अनुराग पाठक फोटो खिंचवाते नजर आ रहे है जो कि अब आमने आई है।
प्रदीप उपाध्याय ने परीक्षा के दौरान परीक्षा हॉल में जाकर फोटो को खींच कर व्हाट्सएप ग्रुप में वायरल की हो सुरक्षा की दृष्टि से अनुचित है और परीक्षा की गोपनीयता और सुरक्षा पर खतरा है जब इलेक्ट्रोनिक उपकरण पूर्ण प्रतिबंधित थे तो शिक्षक मोबाईल परीक्षा हॉल में क्यों और किस उद्देश्य से ले गया,
क्या प्रशिक्षण अधिकारी अभ्यर्थी किसी को नकल करना के उद्देश्य से मोबाइल परीक्षा हॉल के अन्दर ले गया
यह बड़ा चिंताजनक गंभीर एवं निंदनीय कार्य है
यह बात की जानकारी केंद्राध्यक्ष को होने के उपरांत भी परीक्षण अधिकारी प्रदीप उपाध्याय पर को भी कार्यवाही नहीं की।
परीक्षा केन्द्र की गोपनीयता और सुरक्षा को भंग कर नियम व कानूनों के उल्लंघन किया है
नियम -
मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियम-
मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के तहत सरकारी कर्मचारी को आधिकारिक कर्तव्य के दौरान गोपनीयता भंग या अनुशासनहीनता पर निलंबन, पदावनति या बर्खास्तगी हो सकती है। परीक्षा ड्यूटी पर फोटो लीक करना आचरण नियम उल्लंघन माना जाएगा।
परीक्षा गोपनीयता नियम-
मध्यप्रदेश मान्यता प्राप्त परीक्षा अधिनियम 1937 (या संशोधित) के तहत अनुचित साधन या गोपनीयता भंग पर 3 वर्ष कारावास या 5000 रुपये जुर्माना। हालिया संशोधन में नकल/लीक पर 10 वर्ष जेल और 1 करोड़ जुर्माना का प्रावधान है, जो फोटो वायरल पर लागू हो सकता है।
मध्यप्रदेश मान्यता प्राप्त परीक्षा अधिनियम-
(2007 में संशोधित): परीक्षा की गोपनीयता भंग, प्रश्नपत्र या हॉल फोटो वायरल करने पर अपराध है। प्रस्तावित संशोधन में पेपर लीक या गोपनीयता भंग पर 10 साल जेल से आजीवन कारावास और 1 करोड़ तक जुर्माना।
लोक परीक्षाएं (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम-
2024: MPPSC जैसी सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधन (फोटो शेयर सहित) पर 3-5 साल जेल (न्यूनतम) और 10 लाख जुर्माना; संगठित अपराध पर 5-10 साल और 1 करोड़ जुर्माना।
मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण)-
नियम, 1965: नियम 23 के तहत शासकीय कर्मचारी (शिक्षक) को ड्यूटी के दौरान मोबाइल प्रतिबंधित; उल्लंघन पर विभागीय जांच, निलंबन या बर्खास्तगी।
भारतीय दंड संहिता (IPC)/भारतीय न्याय संहिता (BNS)- धारा 166/ BNS 198 (सार्वजनिक सेवक द्वारा आदेश उल्लंघन) पर 1 साल जेल या जुर्माना; गोपनीयता भंग पर अन्य धाराएं लागू हो सकती हैं।