सागर - सर्वोच्च न्यायालय द्वारा विस्तृत निर्देश देते हुए स्कूली बच्चों की बसों में उनके सुरक्षित आवागमन हेतु विस्तृत मार्गदर्शी गाइड लाइन्स जारी की गयी थी, जिसमें परिवहन, स्कूल प्रबंधन, स्कूल बस संचालकों से निम्न निर्देशों का पालन कराने के निर्देश दिये गये है। इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी, सागर को जिले के समस्त स्कूल संस्थानों को उच्चतम न्यायालय के दिशा निर्देशों एवं परिवहन आयुक्त महोदय, मध्यप्रदेश ग्वालियर के पत्र क्रमांक 3020/नीति/स्कूल/टीसी/2019 ग्वालियर दिनांक 24.06.2019 के अनुसार स्कूल बसों में सुरक्षा संबंधी उपायों का पालन कराने हेतु आवश्यक निर्देश जारी करने हेतु पत्र जारी किया गया है कि स्कूल प्रारंभ होने के पूर्व संस्था में संलग्न स्कूल वाहनों के दस्तावेजों को पूर्ण कराकर ही स्कूली वाहन संचालित करवाये जावे। उपरोक्त पत्र में स्कूल बस आपरेटर, स्कूल प्रबंधन, अभिभावक, पुलिस तथा परिवहन विभाग की भूमिका निर्धारित की गई है। जिसके अंतर्गत स्कूल बस संचालक स्कूल बस में निम्नलिखित मापदण्डों की पूर्ति सुनिश्चित करेगें -
1. स्कूल बस का रंग पीला होना चाहिए।
2. केन्द्रीय मोटरयान नियम 1989 के प्रावधान अनुसार बसों के आगे और पीछे बड़े व स्वच्छ अक्षरों में ‘‘स्कूल बस’’ लिखा होना चाहिये।
3. यदि स्कूल बस किराये की है, तो उस पर आगे एवं पीछे विद्यालय सेवा में ‘‘आॅन स्कूल ड्यूटी’’ लिखा होना चाहिये।
4. विद्यालय द्वारा उपयोग में लाई जाने वाली किसी बस में निर्धारित सीटों से अधिक संख्या में बच्चें नही बैठाये जाये।
5. प्रत्येक बस में अनिवार्य रूप से प्राथमिक चिकित्सा हेतु फस्र्ट एड बाॅक्स होना अनिवार्य है।
6. बसों की खिड़कियों में आड़ी पट्टियां (ग्रिल) अनिार्य रूप से लाई जाये।
7. प्रत्येक बस में अग्नि शमन यंत्र की व्यवस्था हो।
8. बस में स्कूल का नाम और टेलीफोन नम्बर बड़े अक्षरों में अवश्यक लिखा जाये।
9. बस के वाहन चालक को भारी वाहन चलाने का न्यूनतम 5 वर्ष का अनुभव होना चाहिये तथा पूर्व में ट्रेफिक नियमों का दोषी ठहराया गया नहीं होना चाहिये।
10. केन्द्रीय मोटरयान नियम 1989 के नियम 17 के प्रावधान अनुसार बस में वाहन चालक के अतिरिक्त एक अन्य वयस्क व्यक्ति भी हो, यदि बस में छात्रायें भी हो तो उस बस में हिला अध्यापक अथवा सहायिका की व्यवस्था सुनिश्चित हो।
11. बच्चों के बस्ते रखने के लिये सीट के नीचे जगह होना चाहिये।
12. बसों में नियमानुसार दो दरवाजे प्रवेश एवं निर्गम हो तथा आपातकालीन खिड़की लगी हो।
13. बस में गति नियंत्रक यंत्र 40 किलोमीटर प्रतिघण्टा की स्पीड पर फिक्स किया हुआ लगा हो।
14. बसों में दरवाजों पर लगे ताले ठीक स्थिति में होना चाहिये।
15. किसी भी शिक्षक अथवा पालक को बस में सुरक्षा मुआयना करने की दृष्टि से जाने की सुविधा हो।
16. यह सुनिश्चित हो कि, स्कूल बस के चालक का नेत्र परीक्षण तथा इस दृष्टि से स्वास्थ्य परीक्षण कि वह मादक द्रव्यों के सेवन का आदी तो नहीं है, नियमानुसार 06 माह के अंतराल में वाहन चालक का डाॅक्टरी परीक्षण कराया जाना आवश्यक है।
स्कूल प्रबंधन द्वारा स्कूल स्कूल के स्वामित्व की अथवा अनुबंधित स्कूल वाहनों मे निम्नलिखित मापदण्डों की पूर्ति आवश्यक है -
1. स्कूल प्रबंधन द्वारा यह संपूर्ण ब्यौरा रखा जावे कि, कौन सा बच्चा किस वाहन से स्कूल आ रहा है अथवा स्कूल से जा रहा है।
2. स्कूल प्रबंधन द्वारा बच्चों को स्कूल लाने-ले जाने वाले समस्त वाहनों के आवश्यक दस्तावेजों जैसे-ड्रायविंग लायसेंस, पुलिस वैरिफिकेशन वाहन का रजिस्ट्रेशन, फिटनेस, परमिट, बीमा, पीयूसी प्रमाण पत्र का एक सेट आवश्यक रूप से रखा जाये।
3. स्कूली वाहन के रूप में एलपीजी से संचालित वाहन का प्रयोग सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत विस्फोटक है। अतः स्कूल प्रबंधन द्वारा यह निगरानी रखी जावे कि, स्कूल का कोई भी बच्चा एलपीजी संचालित वाहन से स्कूल न जाये और ऐसा होने पर उसका दायित्व होगा कि, इस संबंध में तत्काल पुलिस प्रशासन एवं परिवहन विभाग को सूचित किया जाये। ऐसा न करने पर दुर्घटना की स्थित में संपूर्ण जबावदेही स्कूल प्रबंधन की होगी।
4. स्कूल प्रबंधन यह सुनिश्चित करे कि, प्रत्येक वाहन से निर्धारित संख्या में बच्चों का परिवहन किया जाये।
5. स्कूल प्रबंधन यह सुनिश्चित करे कि, वाहनों को स्कूल परिसर के सिी सुरक्षित स्थान पर ही सीसीटीव्ही की निगरानी में उतारा चढ़ाया जाये।
6. स्कूल प्रबंधन यह भी निगरानी रखे कि, वाहन में उचित मानक स्तर का अग्निशमन यंत्र, फस्र्ट एड किट, जीपीएस, स्पीड गवर्नर, सीसीटीव्ही कैमरे लगे हो।
7. स्कूल प्रबंधन द्वारा स्कूली वाहन में लगे जीपीएस की नियमित रूप से माॅनिटरिंग किया जाना आवश्यक है।
8. प्रत्येक स्कूल में स्कूली शिक्षा विभाग के निर्देशों के क्रम में ‘‘शाला परिवहन समन्वय समिति’’ का गठन किया जाना आवश्यक है।
बच्चों के माता-पिता (अभिभावक) का दायित्व -
1. माता-पिता, अपने बच्चों की स्कूल आते-जाते समय सुरक्षा के प्रति स्वयं भी बराबर के उत्तरदायी है। अतः अभिभावकों को यह आवश्यक रूप से सुनिश्चित करना चाहिये कि, स्कूली वाहनों में समस्त सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है अथवा नहीं।
2. चालक/परिचालक या अन्य कर्मचारियों द्वारा किये गये नियमों के उल्लंघन को ध्यान में रखना चाहिये तथा अविलम्ब इसकी सूचना संबंधित स्कूल प्राधिकारियों व राज्य प्राधिकारियों को देनी चाहिये।
3. माता-पिता को, अभिभावक-शिक्षक बैठक (Parents Teacher Meeting) में आवश्यक रूप से भाग लेकर अपने बच्चों की सुरक्षा के संबंध में चर्चा करना चाहिये।
4. माता-पिता को ऐसी वाहनों, जिनके पास वैध परमिट तथा वैध चालक लायसेंस धारक ड्रायवर न हो के, उपयोग करने से बचना चाहिये।
5. माता-पिता को ऐसी वाहनों में बच्चों को नही बैठाना चाहिये जिनमें बैठक क्षमता से 1.5 गुना से अधिक बच्चे बैठे हो, जैसे आॅटो रिक्शा में अधिकतम 05 बच्चे।
6. माता-पिता को इस संवेदनशील विषय पर एक सतर्क पर्यवेक्षक की भूमिका निभानी चाहिये।
7. ऐसे अभिभावक जो माननीय न्यायालयों द्वारा जारी गाइड लाईन पालन न करने वाले वाहनों से बच्चों को स्कूल भेजते है, उनके विरूद्ध भी प्रचलित नियमों के तहत् वैधानिक कार्यवाही की जाना प्रस्तावित की जा सकेगी।
पुलिस/परिवहन का दायित्व -
1. पुलिस एवं परिवहन द्वारा स्कूल बस संचालक, स्कूल प्रबंधन द्वारा माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा एवं केन्द्र/राज्य सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित हो रहा है अथवा नहीं, इसका परीक्षण एवं वाहनों का भौतिक सत्यापन करना तथा इनका उल्लंघन होने पर नियमानुसार वैधानिक कार्यवाही करना, तथा स्कूल, काॅलेजों में जाकर प्राचार्यो एवं उनके माध्यम से अभिभावकों में जागरूकता लाना।
समस्त अभिभावकों से अपील की जाती है कि वह बच्चों को ऐसे स्कूली वाहन में स्कूल न भेजे जो एलपीजी गैस किट से संचालित है, या अनफिट प्रतीत होते है।
क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी ने समस्त स्कूल बस संचालकों को हिदायत दी गयी कि वह स्कूल बसों का संचालन माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के तहत् समस्त बिन्दुआंे का पालन करें, तथा वाहन में स्पीड गर्वनर, वाहन की कंडीशन, बीमा, फिटनेस, प्रदूषण प्रमाण पत्र, मोटरयानकर भुगतान प्रमाण, फस्टेड बाॅक्स, अग्निशमन यंत्र, चालक का हैबी लायसेंस एवं निर्धारित गणवेश में वाहन का संचालन करे, एवं स्कूली वाहन में बैठक क्षमता अनुसार ही छात्र/छात्राओं को बैठायें। यदि चैकिंग के दौरान उक्त कमियों के वाहन संचालित होते हुए पाये गये तो नियमानुसार कार्यवाही की जावेगी।