कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने जिले में अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित छात्रावासों की कार्यप्रणाली को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। क्षमता से कम न चलें छात्रावास, शत-प्रतिशत सीटों पर हों प्रवेश ।


 सागर -कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने जिले में अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित छात्रावासों की कार्यप्रणाली को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। बुधवार को आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि कोई भी छात्रावास अपनी निर्धारित क्षमता से कम पर संचालित नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जितनी सीटें स्वीकृत हैं, वे सभी भरी रहें, ताकि पात्र छात्रों को शासन की योजनाओं का पूर्ण लाभ मिल सके।
इस बैठक में जिले के सभी छात्रावासों के अधीक्षक और विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। कलेक्टर ने एक-एक कर छात्रावासों की वर्तमान स्थिति, छात्र संख्या और वहां उपलब्ध सुविधाओं की समीक्षा की।
कलेक्टर ने निर्देश दिये कि आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए प्रवेश प्रक्रिया में तेजी लाई जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि एक भी सीट खाली न रहे।
अनुसूचित जाति और जनजाति के छात्रों के ऑनबोर्डिंग और प्रवेश प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के निर्देश दिए गए। जो छात्रावास निजी भवनों में संचालित हैं, उनके रेंट एग्रीमेंट (किरायानामा) और अनुबंधों को समय पर पूरा करने के भी निर्देश दिए।
कलेक्टर ने छात्रावासों में साफ-सफाई, पौष्टिक भोजन, पेयजल और निर्बाध विद्युत आपूर्ति पर विशेष जोर दिया। पेयजल गुणवत्ता के लिए पीएचई विभाग के माध्यम से जल के नमूनों की जांच कराने के निर्देश भी दिए गए ताकि छात्रों के स्वास्थ्य से कोई समझौता न हो।
जाति प्रमाण पत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेजों के सत्यापन कार्य को एसडीएम स्तर से हल कराने कहा गया।
श्रीमती पाल ने स्पष्ट किया कि छात्रावासों के संचालन में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। स्थापना और अन्य प्रशासनिक कार्यों में होने वाले विलंब को दूर करने के लिए संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इस समीक्षा बैठक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शासन द्वारा अनुसूचित जाति एवं जनजाति के विद्यार्थियों के लिए चलाई जा रही आवासीय योजनाएं अपने पूर्ण सामर्थ्य के साथ जमीनी स्तर पर प्रभावी हों।

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