बीएमसी सागर में सफल कॉर्निया ट्रांसप्लांट: मरणोपरांत नेत्रदान से दो महिलाओं के जीवन में लौटा उजाला।


 सागर - बुंदेलखंड चिकित्सा महाविद्यालय के नेत्र रोग विभाग में मरणोपरांत प्राप्त हुए नेत्रदान से दो पीड़ित महिलाओं की आंखों का कॉर्निया सफलतापूर्वक ट्रांसप्लांट किया गया है। इस सफल सर्जरी से दोनों महिलाओं के जीवन का अंधकार दूर हुआ है और उन्हें नई दृष्टि मिली है।
10 साल बाद मिली ग्रामीण युवती को रोशनी
नेत्र प्रत्यारोपण (केराटोप्लास्टी) का पहला लाभ सागर शहर के नजदीकी ग्रामीण क्षेत्र की रहने वाली एक 21 वर्षीय युवती को मिला है। यह युवती पिछले लगभग 10 वर्षों से कॉर्निया में खराबी के कारण दोनों आंखों से देख पाने में असमर्थ थी। कुछ दिन पूर्व ही उसने बीएमसी के 'आई बैंक' में संपर्क किया था, जहाँ डॉक्टरों ने आवश्यक जांच के बाद उसे सर्जरी के लिए रजिस्टर्ड किया। दान में मिले स्वस्थ कॉर्निया को उसकी खराब पुतली के स्थान पर सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित कर दिया गया है।
मोतियाबिंद के बाद गंवाई रोशनी, अब फिर देख सकेंगी महिला
दूसरा सफल ट्रांसप्लांट सागर शहर की ही निवासी एक 47 वर्षीय महिला का हुआ है। करीब छह महीने पहले महिला का मोतियाबिंद का ऑपरेशन हुआ था, लेकिन पुतली में खराबी आ जाने के कारण उन्हें दिखाई देना बंद हो गया था। बीएमसी आई बैंक के चिकित्सकों ने जांच के बाद महिला का रजिस्ट्रेशन किया और मरणोपरांत प्राप्त दूसरे कॉर्निया को उनकी आंख में सफलतापूर्वक ट्रांसप्लांट कर दिया।
मीडिया प्रभारी डॉ. सौरभ जैन ने कहा, यह सफलता समाज में नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी। अक्सर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जानकारी के अभाव के कारण लोग नेत्रदान से झिझकते हैं, लेकिन इस सफल प्रत्यारोपण ने यह साबित किया है कि हमारा एक फैसला किसी की पूरी जिंदगी बदल सकता है। अंधत्व निवारण के इस पुनीत कार्य में समाज के सभी वर्गों को आगे आना चाहिए और अधिक से अधिक लोगों को नेत्रदान का संकल्प लेना चाहिए ताकि किसी के जीवन का अंधेरा दूर किया जा सके।
इस जटिल और सफल नेत्र प्रत्यारोपण सर्जरी में बीएमसी नेत्र रोग विभाग के विभागाध्यक्ष व आई बैंक इंचार्ज डॉ. प्रवीण खरे, डॉ. सारिका चौहान, डॉ. अंजलि वीरानी पटेल और डॉ. रोशी जैन सहित सीनियर रेजिडेंट्स, जूनियर पीजी डॉक्टर्स एवं नर्सिंग स्टाफ की सराहनीय और सक्रिय भूमिका रही।
एक नेत्रदान से बदल सकती हैं दो जिंदगियां
नेत्र रोग विशेषज्ञों ने बताया कि किसी हादसे, चोट या अल्सर के कारण जिनकी पुतली खराब हो जाती है, उन्हें केवल नेत्र प्रत्यारोपण के जरिए ही दोबारा रोशनी दी जा सकती है। एक व्यक्ति के मरणोपरांत किए गए कॉर्निया दान से दो जरूरतमंद लोगों के जीवन को रोशन किया जा सकता है। मरणोपरांत किया जाने वाला नेत्रदान पूरी तरह स्वैच्छिक है। बुंदेलखंड चिकित्सा महाविद्यालय के आई बैंक में नेत्र प्रत्यारोपण की यह अत्याधुनिक सुविधा पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध है।
बीएमसी के डीन डॉ. पी. एस. ठाकुर ने इस दोहरे सफल ट्रांसप्लांट पर पूरी मेडिकल टीम को बधाई देते हुए कहा, "बुंदेलखंड चिकित्सा महाविद्यालय में सुपर स्पेशियलिटी स्तर की स्वास्थ्य सुविधाएं और जटिल सर्जरीज अब निरंतर हो रही हैं। हमारा आई बैंक और नेत्र रोग विभाग लगातार उत्कृष्ट कार्य कर रहा है। मरणोपरांत नेत्रदान करने वाले पुण्य आत्मा के परिवार का समाज सदैव ऋणी रहेगा, जिन्होंने दुख की घड़ी में भी मानवता की सेवा का इतना बड़ा फैसला लिया। बीएमसी प्रबंधन यहाँ आने वाले हर जरूरतमंद को श्रेष्ठ और निःशुल्क उपचार देने के लिए प्रतिबद्ध है।

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